जयपुर नवंबर 2026: धनतेरस, जिसे धन्वंतरि त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है, कार्तिक महीने में कृष्ण पक्ष के तेरहवें दिन (त्रयोदशी) को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। यह त्योहार न केवल धन की पूजा से जुड़ा है, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि के उत्सव के रूप में भी इसका गहरा महत्व है।
यह दिन भगवान धन्वंतरि को समर्पित है, जिन्हें आयुर्वेद का देवता और पारंपरिक भारतीय चिकित्सा का जनक माना जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, भगवान धन्वंतरि भगवान विष्णु के अवतार हैं और अच्छे स्वास्थ्य, उपचार और खुशहाली के लिए उनकी पूजा की जाती है
भगवान धन्वंतरि कौन हैं?
भगवान धन्वंतरि को दिव्य रूप में चित्रित किया गया है, उनके एक हाथ में अमृत से भरा कलश है, जो जीवन, स्वास्थ्य और दीर्घायु का प्रतीक है। उनके दूसरे हाथों में पारंपरिक रूप से शंख, चक्र, औषधीय जड़ी-बूटियाँ और आयुर्वेद से जुड़े पवित्र ग्रंथ पकड़े हुए दिखाए गए हैं
चिकित्सा और उपचार से उनके जुड़ाव के कारण, डॉक्टर, हकीम, आयुर्वेदिक चिकित्सक और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोग भगवान धन्वंतरि को अपना पूज्य देवता मानते हैं। माना जाता है कि धनतेरस पर उनकी पूजा करने से अच्छा स्वास्थ्य मिलता है और परिवार को बीमारियों से बचाया जाता है
समुद्र मंथन का महत्व
धनतेरस की उत्पत्ति समुद्र मंथन, या ब्रह्मांडीय महासागर के मंथन की हिंदू कथा से जुड़ी है
पौराणिक कथा के अनुसार, देवताओं (देवों) और राक्षसों (असुरों) ने मिलकर समुद्र मंथन किया, जिसमें से एक के बाद एक चौदह दिव्य खजाने निकले। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि अमृत से भरा कलश लेकर समुद्र से प्रकट हुए थे।
उनके प्रादुर्भाव को भगवान धन्वंतरि की जयंती के रूप में मनाया जाता है। धन्वंतरि और त्रयोदशी शब्दों के मेल से धन्वंतरि त्रयोदशी कहा जाने लगा, जिसे आम भाषा में धनतेरस कहा जाता है।
स्रोत: Maverick News30


